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मंगलवार, 10 मई 2011

SAMAY DARPAN


शनिवार, २ अप्रैल २०११

dream fall

Mera sunder sapna tut gaya

"भगवान" का सपना फिर रह गया अधूरा

"भगवान" का सपना फिर रह गया अधूरा

मुंबई। क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर एक बार फिर शतकों का शतक बनाने से चूक गए। फाइनल में सभी क्रिकेट प्रशंसकों को सचिन से शतकों के महाशतक की उम्मीद थी लेकिन क्रिकेट विश्वकप केफाइनल मैच में वह 18 रन बनाकर आउट हुए। श्रीलंकाई टीम के तेज गेंदबाज मलिंगा ने सचिन को 18 के स्कोर पर अपना शिकार बनाया।
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इससे पहले सेमीफाइनल मैच में भी उनसे शतकों के महाशतक की उम्मीद थी लेकिन पाकिस्तान के खिलाफ वह 85 के स्कोर पर आउट हो गए थे। गौरतलब है कि वानखेड़े स्टेडियम में पिच बनाने वाले क्यूरेटर ने कहा था कि अगर सचिन 30 मिनट तक क्रीज पर टिक जाते हैं तो वह शतक बना लेंगे। लेकिन उनकी यह भविष्यवाणी भी सही साबित नहीं हो पाई।

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बृहस्पतिवार, ६ जनवरी २०११

भारत में माना जाता है कि प्रार्थना में बड़ी शक्ति होती है, अब यह बात साबित भी हो गई है। एक नए शोध के मुताबिक जो लोग जीवन के कठिन दौर में प्रार्थना का रास्ता चुनते हैं, वे अपनी भावनाओं और समस्याओं से आसानी से निपट सकते हैं।विस्कोंसिन मेडिसन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं का दावा है कि अमेरिका में 75 प्रतिशत लोग ऐसे हैं, जो बीमारी, दुख, सदमे और गुस्से के कारण पैदा होने वाले नकारात्मक भावों से बचने के लिए सप्ताह में एक बार प्रार्थना करते हैं।मुसीबत में प्रार्थना किस प्रकार मददगार हो सकती है इसका पता लगाने के लिए समाजशास्त्र से स्नातक शाने शार्प ने कठिन दौर से गुजर रहे लोगों का साक्षात्कार लिया।
शार्प ने अमेरिका में भौगोलिक, शैक्षणिक और जातीय आधार पर अलग-अलग लोगों का साक्षात्कार लिया। इसमें से अधिकांश लोग ईसाई पृष्ठभूमि से संबंधित थे।शार्प ने बताया कि सोशल फिजियोलॉजिकल क्वाटरली के अंक में गुस्से से उबल रहे लोगों ने बताया कि किस तरह प्रार्थना ने भावनाओं पर काबू पाने में उनकी मदद की। लोगों ने कहा कि उन्हें कोई सुनने वाला मिल गया शार्प ने कहा कि यदि वे दूसरे व्यक्ति को अपशब्द कहते तो इसका परिणाम हिंसा के रूप में सामने आता, लेकिन इसके बजाय उन्होंने प्रार्थना का सहारा लिया। प्रार्थना के दौरान लोग विश्वास करते हैं कि ईश्वर उन्हें देख रहा है और इससे अधिकांशत: सकारात्मक अनुभूति होती है।

मंगलवार, २१ सितम्बर २०१०

chhatisgarh jail

रायपुर । छत्तीसगढ में कैदियों की जेलों में बंद बनने के भोजन के लिए खर्च को कम करने के लिए अब नागरिक आपूर्ति निगम से अनाज लिया जाएगा | । सरकारी सूत्रों ने सोमवार यह जानकारी दी |
उन्होंने कहा कि जेलों में जेलों से छत्तीसगढ में चावल और गेहूं को अब राज्य नागरिक आपूर्ति निगम जाएंगे । निगम द्वारा की जेलों में ए. पी. एल. की श्रेणी के चावल और गेहूं की आपूर्ति में होगा ।
अधिकारियों ने कहा कि नागरिक आपूर्ति खाद्य निगम को उठा रही बंदियों की जेलों में बंद खाद्य मद व्यय की 25 से 30 प्रतिशत तक कमी आयी है । निविदा प्रक्रिया पहले ही पूरी कर आदि का खुले बाजार से राशन खरीदा गया था ।
जेल विभाग के अधिकारियों ने कहा कि बंदियों शक्तियाँ जेल विभाग द्वारा सुविधाओं शासन के मानव अधिकारों की दिशा में संरख्रणका उपबंध करता है । के अनुसार कैदियों के मानक भोजन, वस्त्र और आवास प्रदान करने के साथ ही ध्यान में रखा जा रहे हैं यह है कि भारतीय गुणवत्ता अच्छा है और उनकी खरीद में कम खर्च किया गया । इस दिशा में जेल विभाग को बनाए रखने और गुणवत्ता मानकों में रखते हुए बंदियों के प्रयोग में आने वाले अनाज, दालें, तेल मसालों आदि शामिल हैं । इस प्रकार की खरीद करने का प्रयास कर रहा है जो अच्छी गुणवत्ता के भोजन में कम दरों पर उपलब्ध कराया जा सके कैदी हैं ।
कुल 25 कर रहे हैं जो कि छत्तीसगढ में पांच जेल में केंद्रीय कारागार, 10 जिले और 10 sub-jail जेल में रखा गया । की क्षमता की जेलों में बंद इन चार हजार पांच सौ इन बंदियों की तरह है लेकिन अभी भी 12 हजार कैदियों को बंद कर रहे हैं । छत्तीसगढ राज्य भर में कैदियों के लिए प्रतिदिन लगभग 90 क्विंटल मात्रा में भोजन तैयार किया जाता है और उन्हें खाद्य निश्चित दी गई है ।

शुक्रवार, 6 मई 2011

जय hind

युवाओं से आवाहन

उनका कर्ज चुकाने को,
अपना फर्ज निभाने को।
नया ख़ून तैयार खड़ा है,
राजनीति मेँ आने को॥

जागी अब तरुणाई है,
देश ने ली अंगडाई है।
नई उमर की नई फसल,
अब राजनीति मेँ आई है॥

जण गण मन अधिनायक,
जो है भाग्य विधाता।
लोकतंत्र के सिंहासन का,
असली मालिक मतदाता॥

किसी वाद पर दो मत ध्यान,
राष्ट्रहित मेँ दो मतदान॥
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एक सवाल

यहाँ पर राम बसता है,यहाँ रहमान बसता है
यहाँ हर ज़ात का,हर कौम का इन्सान बसता है
जो हिंदी बोलते है बस वही हिन्दू नहीं होते
वही हिन्दू हैं जिनके दिल में हिंदुस्तान बसता है
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सच्चा प्रेम दुर्लभ है, सच्ची मित्रता और भी दुर्लभ है। अहंकार छोडे बिना सच्चा प्रेम नही किया जा सकता।बिना अनुभव के कोरा शाब्दिक ज्ञान अंधा है।अहंकार छोडे बिना सच्चा प्रेम नही किया जा सकता...और...जिस प्रेम में अहंकार हो वो सच्चा प्रेम नहीं होता।
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रायपुर मदनवाड़ा के नक्सली हमले में जान गंवाने वाले शहीद एसपी वीके चौबे की पत्नी श्रीमती रंजना चौबे ने नक्सलियों से कुछ सवाल कर उन्हें कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने नक्सलियों से पहला पूछा है कि क्या आप वास्तव में मानव अधिकारों के हितैषी हैं? उन्होंने कहा है कि नक्सलियों को खून की हर बूंद का जवाब देना होगा। यहां जारी एक बयान में उन्होंने कहा है कि नक्सली हमलों से पुलिस वाले मारे नहीं गए बल्कि अमर हो गए हैं। इस शहादत से एक अमन व तरक्की पसंद समाज के निर्माण का रास्ता खुलता है।
श्रीमती चौबे ने पूछा है- अपने अधिकार पाने के लिए अराजक और बर्बर तरीके इस्तेमाल करने का हक आपको किसने दिया? आपके तरीके क्या आपको एक सभ्य और सुसंस्कृत समाज में रहने की इजाजत देते हैं? उन्होंने पूछा है कि नक्सलियों को सबसे पहले यह बताना होगा कि वे किसके लिए लड़ रहे हैं। अगर वे जनता के लिए लड़ रहे हैं तो अपने घोषणापत्र के साथ लोगों के बीच क्यों नहीं जाते?

उन्होंने नक्सलियों को याद दिलाया है कि वे आए दिन स्कूलों, अस्पतालों और दूसरे सरकारी भवनों को विस्फोट से उड़ा रहे हैं। ऐसा करके वे क्षेत्र की जनता को बुनियादी सुविधाओं से वंचित कर रहे हैं। किसी भी विकसित समाज की पहचान उसमें उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं से होती है। इन सुविधाओं से जनता को वंचित करने वाले कैसे जनता के हितैषी हो सकते हैं? श्रीमती चौबे ने कहा है कि पुलिस की कोई अलग बिरादरी नहीं होती। पुलिस वाले जनता के बीच से आते हैं।

उन्हें मारकर नक्सली खुद को कैसे जनता के हितैषी कह सकते हैं? श्रीमती चौबे ने नक्सलियों से कहा है- आप इस गलतफहमी में मत रहिए कि आपने उन वीरों को मारा है। आपने तो उन्हें अमर कर दिया। उनकी शहादत तो ऐसे जीवन का आरंभ है जिसमें न कोई भय होगा न आप जैसे कायरों का अस्तित्व। यह ऐसे समाज की शुरुआत है जो अमन व तरक्की पसंद नागरिकों का सभ्य समाज होगा। जनता के बीच से आने वाले पुलिसकर्मियों की हत्या करने वाले नक्सली खुद को जनहितैषी कैसे कह सकते हैं?

अपनों का खून बहाकर कैसी क्रांति?

श्रीमती रंजना चौबे ने नक्सलियों से पूछा है कि वे खून क्यों बहा रहे हैं? उन्होंने कहा है कि अगर नक्सलियों द्वारा बहाए गए खून से समाज का अंशमात्र भी भला होता है तो उनके सभी खून माफ हो सकते हैं लेकिन नक्सली जैसे कायर लोग खून की कीमत नहीं जानते। उन्होंने कटाक्ष कर कहा है कि यदि नक्सली खून की कीमत जानते तो देश की सीमा पर जाकर खून बहाते ,अपने लोगों का खून बहाने वाले किस क्रांति की बात करते हैं ?

क्या ये नक्सली आम आदमी को मारके क्रांति लाना चाहते है ...?
या एसे नक्सली को कुत्ते की तरह मारे जाये ....?
अरे नक्सली सालो थू है तुम्हरी जिन्दगी पर ....!
दोस्तों आपकी क्या राये है नक्सली के प्रति ........?


krisna

यदि ऐसे हमारे जीवन के सारथि हो तो जीवन सुन्दर हो !

लादेन को दफनाने की जगह का नाम किया

'शहीद' सागर

ओसामा बिन लादेन को उत्तरी अरब सागर में जिस स्थान पर दफनाया गया है, उसे कट्टरपंथियों ने ‘शहीद सागर’ नाम दे दिया है। कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के मुस्लिम धर्मगुरु अब्दल हकीम मुराद ने कहा कि अमेरिका की सुपुर्द-ए-आब (समुद्र में दफनाने) की नीति से वह खुद ही विवादों में फंस गया है।

रेडियो 4 के एक कार्यक्रम में मुराद ने कहा कि स्मारक बनने से बचाने के लिए लादेन को समुद्र में दफनाया गया, लेकिन अब कट्टरपंथियों ने उसे ही शहीद सागर नाम दे दिया है। अमेरिका उन्हें नहीं रोक सकता। दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी से जुड़े वकीलों ने गुरुवार को पेशावर उच्च न्यायालय में अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के लिए ‘नमाज-ए-जनाजा’ पढ़ा।

‘इस्लामिक लॉयर्स मूवमेंट’ ने उच्च न्यायालय की लॉन में गुलाम नबी की अगुवाई में ‘गायबाना नमाज-ए-जनाजा’ पढ़ा। जमात-ए-इस्लामी से जुड़े करीब 120 वकीलों ने इसमें भाग लिया। इस दौरान वकीलों ने ‘अमेरिका के लिए मौत’ और ‘ओसामा जिंदाबाद’ जैसे नारे भी लगाए। नमाज-ए-जनाजा के बाद लादेन के लिए फातेहा भी पढ़ा गया।


ये है मेरा भारत..................
आखिर इनका स्वाभिमान कहां पर मर गया !

अपने बच्‍चों को आतंकी नहीं बनाना चाहता था


दुनिया का सबसे खूंखार आतंकवादी ओसामा बिन लादेन अपने बच्‍चों को आतंकवादी नहीं बनाना चाहता था। यह पढ़कर आपको हैरत होगी कि लादेन अपने बच्‍चों को किसी अच्‍छे स्‍कूल में तालीम दिलवाना चाहता था। उसे जीवन भर इस बात का मलाल रहा कि उसकी वजह से उसके बच्‍चों का भविष्‍य अंधकार में डूब गया। यह बातें हम नहीं कह रहे हैं। यह खुद ओसामा ने अपनी वसीयत में लिखा है।क्‍वैत के एक अखबार अल अल्‍माह ने अपने पास अबू अब्‍दुल्‍ला ओसामा बिन लादेन की वसीयत होने का दावा किया है। अखबार का दावा है कि चार पन्‍नों की इस वसीयत में लादेन ने अपने परिवार का जिक्र किया है। यह वसीयत ओसामा ने 14 दिसंबर 2001 को लिखी थी इस पर बाकायदा लादेन के हस्‍ताक्षर भी हैं। वसीयत के मुताबिक लादेन नहीं चाहता था कि उसके बच्‍चे आतंकवादी बने। वो यह भी नहीं चाहता था कि उसकी मौत के बाद उसकी पत्नियां दूसरी शादी करें। वो एक कट्टर मुसलमान था और ईश्‍वर को मानता था।

अब हजारों ओसामा पैदा होंगे....

पाकिस्तान में बिन लादेन की मौत का तीखा विरोध हो रहा है वरिष्ठ नेता हफीज फजल बारेच ने कहा कि अमेरिका के हाथों बिन लादेन की मौत के बाद हजारों बिन लादेन पैदा होंगे. उन्होंने कहा, "एक ओसामा शहीद हो गया है. अब हजारों ओसामा पैदा होंगे क्योंकि उसने मुसलमान विरोधी बलों के खिलाफ एक आंदोलन शुरू किया जो किसी एक शख्स पर निर्भर नहीं करता. अमेरिका ने पहले ओसामा को शहीद किया और फिर उसे लाश बताया." उन्होंने कहा कि अमेरिका के खिलाफ जिहाद जारी रहेगा.पाकिस्तान की सबसे बड़ी धार्मिक पार्टी जेयूआई ने देश भर में अमेरिकी अभियान की निंदा के लिए प्रदर्शनों का आह्वान किया है. क्वेटा में हुई रैली में लगभग डेढ़ हजार लोगों ने हिस्सा लिया. बिन लादेन की मौत के बाद पाकिस्तान में अमेरिका विरोधी भावनाएं प्रबल हो गई हैं. मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड समझे जाने वाले हाफिज सईद से संगठन जमात-उद-दावा ने भी शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया है.

शनिवार, 16 अप्रैल 2011

ye thik hai

cartoon

Happy Holi - Funny Hindi cartoons by TC Chander


Don't trust gal ! (not good)

आज़मा देखो..

    
Sujata Sharma
    
Madhuri Konar
    
Ravinder Handa
    
Neha Sharma
    
Tejinder Singh
   

आज़मा देखो..


Neha Sharma



 
 
 
 
 
 
 
 बुलाने पर नहीं आतीं ये भाषा की अदाएं हैं  
इन्हें शब्दों की जानिब से कभी 
                         तुम आज़मा देखो..

--
       ऋतेष       
 ( 9407658285)      
दुर्ग, छत्तीसगढ़        
   RITESH TIKARIHA  

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                                       thanx....
                                 ok then
                                                


                      
______

बुधवार, 13 अप्रैल 2011

all is them


now right


nice day





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       ऋतेष       
 ( 9407658285)      
दुर्ग, छत्तीसगढ़        
   RITESH TIKARIHA  

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शुक्रवार, 8 अप्रैल 2011

Dhini & Anna is our actual hero

Anna & Dhoni hai hamare real leader

               http://www.msdhoniclub.com/wp-content/uploads/2010/03/MS-Dhoni-Wallpaper-3.jpg

जन लोकपाल बिल लाने के लिए आंदोलन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के समर्थन में पूरा देश उठ खड़ा हुआ है। सामाजिक कार्यकर्ताओं, उद्योगपतियों से लेकर स्‍कूली छात्र-छात्राएं, युवा, नौकरीपेशा, बुजुर्ग, महिलाएं और बॉलीवुड की नामचीन हस्तियां भी उनके समर्थन में आवाज उठाने लगी हैं।
उद्योगपतियों पवन मुंजाल और राहुल बजाज ने भी अन्‍ना हजारे का समर्थन किया है। बजाज ने कहा, 'मुझे अन्‍ना पर सरकार के किसी मंत्री से ज्‍यादा भरोसा है।' पवन मुंजाल ने कहा, 'अब समय आ गया है कि हम भ्रष्‍टाचार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करें।‘
बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्‍चन ने ट्विटर पर जारी ताजा संदेश में कहा है, 'देश हित में जो भी कार्य हो, उसमें हमारा समर्थन हमेशा रहा है और हमेशा रहेगा।'  बॉलीवुड के मशहूर निर्माता निर्देशक महेश भट्ट ने ट्विटर पर जारी संदेश में कहा है, 'यदि आप अन्‍ना हजारे और उनके आंदोलन में यकीन रखते हैं तो याद कीजिए कि महात्‍मा गांधी ने क्‍या कहा था- अहिंसा की राह पर चलने वालों का कोई दुश्‍मन नहीं होता।'

अन्‍ना को समर्थन की आमिर की अपील पर भारतीय टीम के कप्‍तान महेंद्र सिंह धोनी ने ट्विटर पर भेजे अपने संदेश में कहा, ‘मैं आमिर खान से सहमत हूं। अन्‍ना हजारे को भारतीय क्रिकेट टीम से ज्‍यादा समर्थन मिलना चाहिए। कृपया हजारे को अपना समर्थन दें।’
आमिर खान ने कहा था कि भ्रष्टाचार के विरोध में मजबूत कानून लाए जाने को लेकर अन्ना हजारे को वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम इंडिया से ज्यादा समर्थन की जरूरत है। गत 6 अप्रैल को अन्ना को लिखी गई चिट्ठी में आमिर ने उन्हें युवाओं के लिए आदर्श बताया है। आमिर ने प्रधानमंत्री को भी चिट्ठी लिखकर अन्ना की मांग को मानने की अपील की।

गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर जारी संदेश में कहा, 'नवरात्रि के दौरान मां कामाख्‍या के दर्शन होने का सौभाग्‍य प्राइज़ हुआ है। अन्‍ना हजारे के बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य की कामना की।'
बॉलीवुड अभिनेत्री बिपाशा बसु ने ट्विट किया है, 'अन्‍ना हजारे हमलोगों (भारत की जनता) के लिए खड़े हुए हैं इसलिए हमें उनका समर्थन करना चाहिए।'
बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर का कहना है, 'आईपीएल में हिस्‍सा ले रहे सभी खिलाडियों और इन मैचों को देखने वाले क्रिकेटप्रेमियों से अपील करता हूं कि वो अन्‍ना हजारे के आंदोलन को समर्थन दें। जब कोई भ्रष्टाचार से लड़ा रहा हो तो मैं उनके तरीकों को जज नहीं करता। मैं उनके उद्देश्य और कार्यों की सराहना करता हूं। मैं अन्ना हज़ारे के साथ हूं। क्या आप हैं?'
बॉलीवुड अभिनेता शेखर कपूर का कहना है, 'सचिन, धोनी या आमिर नहीं, बल्कि आम आदमी को खड़े होना चाहिए और कहना चाहिए, नहीं! मैं अब और नहीं सहूंगा। और तब क्रांति हो पाएगी। मैं लोकपाल बिल पर राष्ट्रीय बहस कराए जाने के लिए अन्ना हजारे के अनशन का समर्थन करता हूं। कम से कम संसद आगे आए और इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दे। अन्ना हजारे जैसे लोग व्यवस्था के खिलाफ जनांदोलन का दबाव बनाएंगे, जिस तरह गांधी ने अंगेजों के खिलाफ किया था।'

आध्‍यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने कहा, ‘अन्‍ना का आंदोलन भारतीयों की आवाज है। मुझे उम्‍मीद है कि प्रधानमंत्री लोकपाल बिल के गठन के लिए तुरंत कदम उठाएंगे। मैं पिछले 25 साल से अन्‍ना हजारे को जानता हूं। आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन और मैं भ्रष्‍टाचार के खिलाफ उनकी लड़ाई और सामाजिक परिवर्तन की मुहिम में हमेशा से उनके साथ रहे हैं।’
आपकी राय
क्या अन्‍ना दूसरे गांधी साबित होंगे? अपनी ही सरकार के खिलाफ उनकी लड़ाई अंजाम तक पहुंच पाएगी? आखिर अन्‍ना ऐसी क्‍या मांग कर रहे हैं, जिसे मानने में सरकार को परेशानी हो रही है? जो सरकार कहती रही है कि वह भ्रष्‍टाचार के खिलाफ है, उसे भ्रष्‍टाचार पर निगरानी रखने के लिए जनता का एक प्रतिनिधि नियुक्‍त करने में क्‍यों परेशानी हो रही है? क्‍या यह सरकार का भ्रष्‍टाचार से निपटने को लेकर दोहरा रवैया नहीं उजागर करता है? ऐसे में सरकार कभी भ्रष्‍टाचार मिटा पाएगी? सरकार तैयार नहीं है तो जनता अपने दम पर भ्रष्‍टाचार से लड़ सकेगी? या फिर वह भ्रष्‍टाचार के साथ जीने की आदी और इसके लिए अभिशप्‍त हो चुकी है? ऐसे कई सवाल उठते हैं। इन सवालों के जवाब और बाकी सवाल आपस में पूछने-बताने के लिए आप बहस में शामिल हो सकते हैं।

Dhoni hai real hero

http://images.bhaskar.com/web2images/www.bhaskar.com/2011/04/08/images/anna_25611111_f.jpgजन लोकपाल बिल लाने के लिए आंदोलन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के समर्थन में पूरा देश उठ खड़ा हुआ है। सामाजिक कार्यकर्ताओं, उद्योगपतियों से लेकर स्‍कूली छात्र-छात्राएं, युवा, नौकरीपेशा, बुजुर्ग, महिलाएं और बॉलीवुड की नामचीन हस्तियां भी उनके समर्थन में आवाज उठाने लगी हैं।
उद्योगपतियों पवन मुंजाल और राहुल बजाज ने भी अन्‍ना हजारे का समर्थन किया है। बजाज ने कहा, 'मुझे अन्‍ना पर सरकार के किसी मंत्री से ज्‍यादा भरोसा है।' पवन मुंजाल ने कहा, 'अब समय आ गया है कि हम भ्रष्‍टाचार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करें।‘
बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्‍चन ने ट्विटर पर जारी ताजा संदेश में कहा है, 'देश हित में जो भी कार्य हो, उसमें हमारा समर्थन हमेशा रहा है और हमेशा रहेगा।'  बॉलीवुड के मशहूर निर्माता निर्देशक महेश भट्ट ने ट्विटर पर जारी संदेश में कहा है, 'यदि आप अन्‍ना हजारे और उनके आंदोलन में यकीन रखते हैं तो याद कीजिए कि महात्‍मा गांधी ने क्‍या कहा था- अहिंसा की राह पर चलने वालों का कोई दुश्‍मन नहीं होता।'

अन्‍ना को समर्थन की आमिर की अपील पर भारतीय टीम के कप्‍तान महेंद्र सिंह धोनी ने ट्विटर पर भेजे अपने संदेश में कहा, ‘मैं आमिर खान से सहमत हूं। अन्‍ना हजारे को भारतीय क्रिकेट टीम से ज्‍यादा समर्थन मिलना चाहिए। कृपया हजारे को अपना समर्थन दें।’
आमिर खान ने कहा था कि भ्रष्टाचार के विरोध में मजबूत कानून लाए जाने को लेकर अन्ना हजारे को वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम इंडिया से ज्यादा समर्थन की जरूरत है। गत 6 अप्रैल को अन्ना को लिखी गई चिट्ठी में आमिर ने उन्हें युवाओं के लिए आदर्श बताया है। आमिर ने प्रधानमंत्री को भी चिट्ठी लिखकर अन्ना की मांग को मानने की अपील की।

गुजरात के मुख्‍यमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर जारी संदेश में कहा, 'नवरात्रि के दौरान मां कामाख्‍या के दर्शन होने का सौभाग्‍य प्राइज़ हुआ है। अन्‍ना हजारे के बेहतर स्‍वास्‍थ्‍य की कामना की।'
बॉलीवुड अभिनेत्री बिपाशा बसु ने ट्विट किया है, 'अन्‍ना हजारे हमलोगों (भारत की जनता) के लिए खड़े हुए हैं इसलिए हमें उनका समर्थन करना चाहिए।'
बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर का कहना है, 'आईपीएल में हिस्‍सा ले रहे सभी खिलाडियों और इन मैचों को देखने वाले क्रिकेटप्रेमियों से अपील करता हूं कि वो अन्‍ना हजारे के आंदोलन को समर्थन दें। जब कोई भ्रष्टाचार से लड़ा रहा हो तो मैं उनके तरीकों को जज नहीं करता। मैं उनके उद्देश्य और कार्यों की सराहना करता हूं। मैं अन्ना हज़ारे के साथ हूं। क्या आप हैं?'
बॉलीवुड अभिनेता शेखर कपूर का कहना है, 'सचिन, धोनी या आमिर नहीं, बल्कि आम आदमी को खड़े होना चाहिए और कहना चाहिए, नहीं! मैं अब और नहीं सहूंगा। और तब क्रांति हो पाएगी। मैं लोकपाल बिल पर राष्ट्रीय बहस कराए जाने के लिए अन्ना हजारे के अनशन का समर्थन करता हूं। कम से कम संसद आगे आए और इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दे। अन्ना हजारे जैसे लोग व्यवस्था के खिलाफ जनांदोलन का दबाव बनाएंगे, जिस तरह गांधी ने अंगेजों के खिलाफ किया था।'

आध्‍यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने कहा, ‘अन्‍ना का आंदोलन भारतीयों की आवाज है। मुझे उम्‍मीद है कि प्रधानमंत्री लोकपाल बिल के गठन के लिए तुरंत कदम उठाएंगे। मैं पिछले 25 साल से अन्‍ना हजारे को जानता हूं। आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन और मैं भ्रष्‍टाचार के खिलाफ उनकी लड़ाई और सामाजिक परिवर्तन की मुहिम में हमेशा से उनके साथ रहे हैं।’
आपकी राय
क्या अन्‍ना दूसरे गांधी साबित होंगे? अपनी ही सरकार के खिलाफ उनकी लड़ाई अंजाम तक पहुंच पाएगी? आखिर अन्‍ना ऐसी क्‍या मांग कर रहे हैं, जिसे मानने में सरकार को परेशानी हो रही है? जो सरकार कहती रही है कि वह भ्रष्‍टाचार के खिलाफ है, उसे भ्रष्‍टाचार पर निगरानी रखने के लिए जनता का एक प्रतिनिधि नियुक्‍त करने में क्‍यों परेशानी हो रही है? क्‍या यह सरकार का भ्रष्‍टाचार से निपटने को लेकर दोहरा रवैया नहीं उजागर करता है? ऐसे में सरकार कभी भ्रष्‍टाचार मिटा पाएगी? सरकार तैयार नहीं है तो जनता अपने दम पर भ्रष्‍टाचार से लड़ सकेगी? या फिर वह भ्रष्‍टाचार के साथ जीने की आदी और इसके लिए अभिशप्‍त हो चुकी है? ऐसे कई सवाल उठते हैं। इन सवालों के जवाब और बाकी सवाल आपस में पूछने-बताने के लिए आप बहस में शामिल हो सकते हैं।

ANNA or IPL

ट्विटर के ट्रैंडिंग टॉपिक बताते हैं कि इंटरनेट पर क्या चर्चा हो रही है और लोग कैसे विचार शेयर कर रहे हैं। शुक्रवार दोपहर ट्विटर के भारत में सबसे सर्वाधिक चर्चित विषय थे- लोकपाल, अन्ना हजारे, करप्शन, मेरा नेता चोर है, आईपीएल, चेतन भगत, सीएसके और केकेआर।इनमें से सात विषय भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े हुएं आंदोलन से संबंधित थे जिनमें चेतन भगत और उनके द्वारा शुरु किया गया मेरा नेता चोर है अभियान भी शामिल है। इसके साथ ही जो तीन अन्य विषय थे वो हैं आईपीएल, सीएसके यानि चेन्नई सुपरकिंग्स और केकेआर यानि कोलकाता नाइट राइडर्स। यदि ट्विटर पर चर्चित इन विषयों को देश का माहौल समझा जाए तो इस समय देशभर में दो ही मुद्दों पर बात हो रही है एक तो भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग और दूसरा आईपीएल। दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बुजुर्ग भ्रष्टाचार के खिलाफ बैठा और पूरा देश खड़ा हो गया। क्रिकेट विश्वकप जीतने के बाद देश जश्न मनाने सड़कों पर उतरा था। 2 अप्रैल की रात देश के कौने-कौने से यही आवाज आ रही थी- इंडिया-इंडिया। पिछले एक हफ्ते में देश में माहौल थोड़ा बदला है। अब आवाजें आ रही हैं सेव इंडिय-सेव इंडिया। जन लोकपाल बिल लाने के लए uहजारे की आवाज को मजबूत करने में इंटरनेट एक सशक्त माध्यम के रूप में उभरा है। जब से अन्ना अनशन पर बैठे हैं तब से इंटरनेट जगत में सिर्फ और सिर्फ अन्ना हजारे की ही चर्चा हो रही. लेकिन मजे की बात यह है कि आईपीएल विषय में जो ट्वीट्स हो रही हैं उनमें से भी ज्यादार लोगों से आईपीएल की खुमारी में भ्रष्टाचार की लड़ाई को न भूलने की अपील कर रही हैं।
आईपीएल विषय में शेयर की गई कुछ ट्वीट्स इस प्रकार हैं-
1. आईपीएल बीसीसीआई के अधीन है और बीसीसीआई आईसीसीके अधीन है और आईसीसी शरद पवार के अधीन है और अन्ना हजारे शरद पवार के खिलाफ ही तो जंग लड़ रहे हैं इसलिए आईपीएल से सहयोग की उम्मीद नहीं की जा सकती।
2. यदि आप स्टेडियम में आईपीएल का मैच देखने जा रहे हैं तो भ्रष्टाचार के खिलाफ पोस्टर भी ले जाएं।
3. मुझे डर ही की आईपीएल की आंधी में अन्ना का जलाया चराग न बुझ जाए। यदि ऐसा हुआ तो बहुत बुरा होगा।
4. यह देखकर अच्छा लग रहा है कि लोकपाल आईपीएल से ज्यादा ध्यान आकर्षित कर रहा है
5. ललित मोदी मोदी का लोगों से यह अपील करना की आईपीएल देखने जाते वक्त भ्रष्टाचार के खिलाफ पोस्टर लेकर जाओ अच्छा संकेत है।
6. आईपीएल शुरु हो रहा है अब लोग टीवी के आगे बैठकर अनशन करेंगे।
7. मैं आईपीएल (इंडियन पीपुल्स लीग) के साथ हूं जो अन्ना हजारे का समर्थन कर रही है।
8. आप देश को भ्रष्टाचार से बचाएंगे या आईपीएल देखते हुए पॉपकॉर्न खाएंगे।

गुरुवार, 3 मार्च 2011

जहां ना पहुंचा रवि

इस शेर को एकाधिक परिपेक्ष्य में सफ़लता से प्रयोग में लाते देखा है लोगों को.
१. दुनिया बनाने वाले के छुपे राज़ की पर्तों पर [वैज्ञानिक/फ़लसफ़ाई नज़र की दाद में]
२. शम्मा के जलने और परवाने की अनुपलब्धता के परिपेक्ष्य में [हुस्न की समझ और उसके एप्रिसिएशन करने वाले की शान में]
३. जहां ना पहुंचा रवि वहां ठस्स गए कवि वाले केस में... आदी

व्यक्तिगत रूप से मुझे पहले केस पर ही यह माकूल फ़िट लगता है और यह चर्चा भी उसी नतीजे पर है जान कर संतोष हुआ. प्रमोद जी ने यहाँ आगे-पीछे के शेर देकर मामला बड़ा सुलभ कर दिया। इन पर थोड़ी देर सोचने के बाद और कुछ देर तक मित्र फ़रीद ख़ान से विमर्श करने के बाद मैं इस शेर के ऐसे अर्थ के क़रीब पहुँचा हूँ जिससे एक नई रौशनी मिलती है। सबसे पहले तो मेरे विचार से यहाँ नरगिस फूल के अर्थ में है ही नहीं। ईरान कल्चर हाउस दारा प्रकाशित शब्दकोष के अनुसार नरगिस का एक अर्थ प्रियतमा की आँख भी होता है। उसी परम्परा से 'ऐ नरगिसे मस्ताना' जैसे जुमले बनते हैं। नज़्म में लगातार आँख और दृष्टि की बात हो रही है। जहाँबीनी (दुनिया को देखना) चश्मे दिल फिर नज़र.. उस्के आगे फिर दीदावर (देखने वाला)।
 
तो अर्थ कुछ यूँ बनेगा: संसार पर शासन करने से कठिन है संसार को समझना।  जिगर में (कठिनाई झेलने का) ताब रखकर करके ही हृदय में एक दृष्टि पैदा होती है। नहीं तो आँख होते हुए भी बेनूर (यानी अंधी) बनी रहती है। बड़ी मुश्किल से दुनिया को समझने वाला पैदा होता है। यह बात इक़बाल के मर्दे मोमिन के विचार से मेल खाती है। 

गुरुवार, 6 जनवरी 2011

राजद्रोह या धर्मयुद्ध ----sunday mag..

एक तरफ वाम आतंकवाद के आरोप में फंसे डॉ. बिनायक सेन को कोर्ट ने राजद्रोह की सजा सुनाई तो दूसरी ओर मालेगांव और अजमेरशरीफ विस्फोट के सिलसिले में हिंदू संगठनों से जुड़े युवकों पर जांच एजेंसियों का शिकंजा कस रहा है लेकिन माओवाद और नक्सली समर्थकों को जहां अपना संघर्ष जनयुद्ध लगता है वहीं आतंकवाद के चलते जांच एजेंसियों के घेरे में आए हिंदू युवक इस लड़ाई को धर्मयुद्ध के तौर पर पेश कर रहे हैं। इससे राजद्रोह और धर्मयुद्ध को लेकर देश में एक नई बहस खड़ी हो गई है

                                           भारतीय राज्य व्यवस्था को हथियारबंद संघर्ष से चुनौती देना गैर-कानूनी है। यह बात पेशे से चिकित्सक और पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) के प्रमुख पदाधिकारी डॉ. बिनायक सेन भी अच्छी तरह समझते हैं लेकिन इसके बावजूद सेन जेल में बंद नक्सली नेताओं और प्रतिबंधित संगठन माओवादियों के बीच संदेशवाहक का काम करते रहे। बिनायक सेन पर यह भी आरोप है कि वह उन माओवादियों और नक्सलियों का इलाज किया करते थे जो हथियारों के बल पर लंबे समय से देश की सत्ता और संविधान को चुनौती देने का काम कर रहे हैं। ऐसा हथियारबंद संघर्ष भारतीय दंड संहिता में 'राजद्रोह' के बराबर का अपराध माना जाता है।
छत्तीसगढ़ राज्य के रायपुर के सत्र न्यायालय ने जब बिनायक सेन को राजद्रोह के तहत सजा सुनाई तो रायपुर से लेकर दिल्लीClick here to see more news from this city और लंदन-अमेरिका तक इस फैसले पर सवाल उठाए जाने लगे। दूसरी तरफ साध्वी प्रज्ञा, असीमानंद दयानंद पांडे जैसे भगवाधारी और भारतीय सेना में देश की सेवा के लिए शामिल होने वाले कर्नल पुरोहित सरीखे जवान एक ऐसे 'धर्मयुद्ध' में लगे थे जिसकी इजाजत देश का संविधान उन्हें नहीं देता। उनके द्वारा मालेगांव और अजमेर सहित कई स्थानों पर किए गए बम धमाकों ने एक धर्म विशेष के लोगों को आतंकित करने का काम किया। यह दोनों ही कारगुजारियां राजद्रोह और धर्मयुद्ध को लेकर एक नई बहस खड़ी कर रही हैं।
माओवादियों के चितंन और साहित्य से ऐसा लगता है कि उन्हें न तो देश के संविधान में विश्वास है और न ही न्यायपालिका में। चर्चित नक्सली मामले में रायपुर के जिला न्यायालय ने नारायण सान्याल, डॉ. बिनायक सेन और पीयूष उर्फ पीजूष गुहा को उम्रकैद की सजा सुनाई। तीनों को न्यायालय ने देशद्रोह का षड्यंत्र रचने, विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1967 (यूएपीए) एवं छत्तीसगढ़ विशेष जनसुरक्षा अधिनियम के तहत दोषी ठहराया। असल में नक्सलियों के मददगार के मामले में न्यायालय द्वारा दंडित पीयूष उर्फ पीजूष गुहा की गिरफ्तारी के बाद से ही कई राज खुलने लगे थे। तीन साल पहले हुई पूछताछ में पीयूसीएल के नेता डॉ. बिनायक सेन व नक्सलियों के नेता नारायण सान्याल के संबंधों का खुलासा हुआ था। 
केस डायरी के मुताबिक 6 मई, 2007 को चेकिंग के दौरान गंज थाने के तत्कालीन थाना प्रभारी बीएस जागृत ने नक्सलियों के मैसेंजर पीयूष गुहा को संदिग्ध अवस्था में पकड़ा। तलाशी में उसके बैग से नक्सली साहित्य, नारायण सान्याल के लिखे तीन पत्र आदि मिले। पूछताछ में पीयूष ने बताया कि तीनों पत्र बिनायक सेन ने दिए थे। जांच में पाया गया कि ये पत्र नक्सली नेता नारायण सान्याल द्वारा जेल में मुलाकात के दौरान सेन को दिए गए थे। सेन ने पीयूष को उक्त पत्रों में अंकित गोपनीय कोड नंबरों पर प्रेषित करने के लिए दिए थे। सेन अक्सर नारायण सान्याल से जेल में मिलने आते थे। वह अपना परिचय नारायण के भाई तथा रिश्तेदार के रूप में देते थे। डॉ. सेन को बिलासपुर के तारबहार इलाके से गिरफ्तार किया गया।
सेन के कटोरा तालाब स्थित आवास से जब्त दस्तावेज, कंप्यूटर, सीपीयू को हैदराबादClick here to see more news from this city फोरेसिंक लैब में जांच के लिए भेजा गया। उनसे चौंकाने वाली बात सामने आई। नारायण सान्याल के खिलाफ छत्तीसगढ़ के अलावा आंध्र प्रदेश, बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र में भी अपराध दर्ज हैं। पूरे प्रकरण में 1180 पेज का आरोप पत्र पुलिस ने न्यायालय में पेश किया। हालांकि सेन की पत्नी इलिना का कहना है कि राज्य पुलिस द्वारा तैयार डायरी फर्जी है। मनगढ़ंत तथ्य तैयार कर उनके पति के खिलाफ पेश किए गए हैं।
पुलिस द्वारा पेश किए सबूत ठोस नहीं है। वे जनहित के मुद्दों पर आवाज उठाते थे। मगर, इस प्रकरण के बाद माओवादियों के चाल-चलन को लेकर चौतरफा बहस हो रही है। माओवादी नक्सली समर्थक उन्हें आतंकवादी या लुटेरा नहीं बल्कि आदिवासियों का हमदर्द और जंगल के रक्षक के रूप में पेश करते हैं। केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदंबरम की मानें तो माओवादी न्यायाधिकारी या दंडाधिकारी नहीं हैं। उन्हें हथियार लेकर चलने का भी कोई हक नहीं है। सीपीआई (माओवादी) एक प्रतिबंधित संगठन है जिसकी गतिविधियां गैर कानूनी हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी अपने भाषण में यह कह चुके हैं कि वामपंथी उग्रवाद देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए अकेला सबसे बड़ा खतरा है। 
असल में माओवादी-नक्सलियों की क्रांति से आतंकवाद तक की कहानी भयानक हत्याकांडों से भरी हुई है। आतंक के इस चेहरे को इन आंकड़ों से भी समझा जा सकता है कि बीते छह वर्षों में जितने लोग माओवादी-नक्सली हिंसा में मारे गए उनकी संख्या इस दौरान जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर के आतंकवाद प्रभावित क्षेत्रों में मारे गए लोगों से कहीं ज्यादा थी। इस अवधि में 2802 निर्दोष लोग नक्सल हिंसा में मारे गए। एक हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी शहीद हुए और मुठभेड़ के दौरान 977 माओवादी आतंकवादी मारे गए।

2007
से 2009 के मध्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 5395 घटनाएं घटीं। इनमें 557 नक्सली मारे गए लेकिन डेढ़ हजार से अधिक नागरिकों और 784 सुरक्षाकर्मियों को भी अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। माओवादी आतंकवाद अपनी जड़ें कितनी गहरी जमा चुका है इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि देश के 20 राज्यों के 223 जिले उनका शिकार बन चुके हैं। आंध्र प्रदेश में माओवादी कार्रवाइयां थमने के बाद छत्तीसगढ़ माओवाद से सबसे बुरी तरह प्रभावित है।
बस्तर का लगभग 70 फीसदी इलाका माओवादी नियंत्रण में है। नक्सली इस क्षेत्र में एक समानांतर सरकार चला रहे हैं और राष्ट्र के खिलाफ अपनी लड़ाई चालू रखने की कसम खाते हैं। इस लड़ाई को वे 'लोगों का संघर्ष' कहते हैं। बस्तर के घने जंगल माओवादियों की शरणगाह माने जाते हैं। यह 'रेड कॉरिडोर' का एक हिस्सा है जो नेपाल सीमा से आंध्र प्रदेश तक जाता है (माओवादी इसे दंडकारण्य जोन कहते हैं)। दक्षिणी बस्तर में माओवादियों ने चिंतानेर इलाके को अपनी राजधानी घोषित किया है। छत्तीसगढ़ में सीपीआई (माओवादी) के लगभग 10,000 कैडर काम कर रहे हैं जिनमें स्थानीय गुरिल्ला स्क्वायड और 'जन मिलिशिया' इकाइयां शामिल हैं। लगभग 5,000 नक्सली सिर्फ बस्तर में बताए जाते हैं। उनके पास आधुनिक हथियार जैसे रॉकेट लांचर, एके-47 राइफलें, ग्रेनेड, पिस्तौल, लैंडमाइंस, इनसास राइफलें हैं जिन्हें उन्होंने सुरक्षाकर्मियों से लूटा है।
अगर कोई सात नक्सल प्रभावित राज्यों - छत्तीसगढ़, झारखंड, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, बिहार, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र में 'करों' से अर्जित आय का हिसाब जोड़े तो यह राशि 10,000 करोड़ रुपए वार्षिक से अधिक हो सकती है। पुलिस ने 'लेवी चार्ट' बरामद किया है जिसमें ठेकेदारों, पेट्रोल पंप और भूस्वामियों, व्यवसायियों, ट्रांसपोर्टरों और इंडस्ट्रियल हाउसों से एकत्रित की जाने वाली राशि दी गई थी। वे प्राप्त 'चंदे' के लिए रसीद तक देते हैं। यह शुल्क सड़कों का निर्माण करने वाले ठेकेदारों से परियोजना लागत के 10 फीसदी से लेकर छोटे पुल बनाने वालों और अन्य से 5 फीसदी तक है। बहरहाल, निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां अपने रिकॉर्डों में माओवादियों को भुगतान किए जाने वाले 'कर' को नहीं दर्शाते। आमतौर पर वे किसी खास ठेकेदार को बड़े टेंडर आवंटित करते हैं जिनके माध्यम से शुल्क वामपंथी उग्रवादियों को जाता है।
पुलिस के खिलाफ जारी हिंसा में नक्सली क्रूर हैं और वे गरीबों तक को नहीं छोड़ते इसका उदाहण पश्चिम बंगाल के बांकुरा इलाके के पुलिस जवान संजय घोष के अपहरण और उसकी निर्मम हत्या से मिलता है। नक्सलियों ने 24 जनवरी, 2010 को उसका अपहरण करने के बाद बेहद यातनाएं दीं। उसका सिर काटने से पहले उसके हाथ काट दिए गए थे।
दरअसल, नक्सली अपने वर्ग शत्रुओं की सूची में पुलिस को सबसे ऊपर रखते हैं। उन्हें लगता है कि क्रांति-विरोधी सरकार पुलिस बल के जरिए ही उनका दमन करती है। लिहाजा सुरक्षा बलों पर हमले किए जाते हैं। पुलिस बलों पर हमले से गांववासियों और पुलिस के मुखबिरों में नक्सलियों की दहशत घर कर जाती है। इस दहशत का लाभ नक्सली क्षेत्र में अपना दबदबा बनाने में उपयोग करते हैं।
झारखंड में पुलिस अधिकारी फ्रांसिस इंदवार का अपहरण कर गला काटकर हत्या कर दी गई तो पश्चिम बंगाल में पुलिस सब-इंस्पेक्टर अतींद्रनाथ दत्त का अहपहण कर उसकी रिहाई के बदले में अपने समर्र्थकों को जेल से रिहा करवा लिया गया। देश के खिलाफ माओवादियों की सोच और राजद्रोह जैसा उनका आचरण इस बात से भी समझा सकता है कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के प्रमुख कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी ने लालगढ़ के दोहोमिना गांव में संवाददाता सम्मेलन में दत्त की रिहाई का एलान किया। सरकार के साथ टकराव में माओवादियों ने दत्त को युद्ध कैदी घोषित किया। दत्त के सीने पर लगे एक पोस्टर पर लिखा गया था, 'युद्ध कैदी की रिहाई के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस।' बंगाल में सीपीआई (माओवादी) की ओर से पुलिसवालों को लिखा गया एक पत्र सामने आया जिसमें कहा गया था कि पुलिस सरकार के खिलाफ विद्रोह कर दे। हमारा उद्देश्य सरकारी तंत्र को ध्वस्त कर अपना तंत्र स्थापित करना है।
छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक विश्वरंजन कहते हैं कि माओवादी नक्सली आतंकवादियों से भी कहीं ज्यादा खतरनाक हैं। अगर यह आतंकवाद तक ही सीमित रहता तो शायद कुछ आसानी रहती। हम आतंकवाद का नहीं बल्कि युद्ध का सामना कर रहे हैं। नक्सली लोकतंत्र में विश्वास नहीं करते और हिंसा के जरिए पूरे देश पर शासन करना चाहते हैं।' इस बात की ओर मिलिट्री इंटेलीजेंस की एक अत्यंत गोपनीय रिपोर्ट भी इशारा करती है। रिपोर्ट के मुताबिक माओवादी सन्‌ 2050 तक दिल्लीClick here to see more news from this city पर काबिज होना चाहते हैं। इसके लिए वह सोच-समझकर अपनी रणनीति को अंजाम दे रहे हैं।
नक्सलियों का लाल गलियारा नेपाल से लगने वाली देश की सीमा से शुरू होकर आंध्र प्रदेश तक जाता है। लंबे अरसे तक नक्सलवाद को मानवीय या आदिवासी समस्या के रूप में देखती आई केंद्र सरकार ने वर्ष 2009 में सीपीआई (माओवाद) को प्रतिबंधित संगठन माना और प्रतिबंधित किया। वरिष्ठ पत्रकार और 'नक्सली आतंकवाद' नामक पुस्तक लिखने वाले विवेक सक्सेना कहते हैं कि प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता और नक्सलवाद के विकास में सीधा संबंध देखने को मिलता है। देश में किए गए तमाम अध्ययनों से यह साफ हुआ है कि जिस राज्य में खनिज और दूसरे प्राकृतिक संसाधनों की जितनी ज्यादा मौजूदगी है वहां नक्सलवाद भी उतना ही ज्यादा पनपा है।'
एक मोटे अनुमान के मुताबिक वे हर साल लगभग 1,200 करोड़ रुपए एकत्रित करते हैं। गृह मंत्री चिदंबरम माओवादियों को चालाक पूंजीवादी करार देते हुए कहते रहे हैं कि वे अपना व्यवसाय अवैध ढंग से चला रहे हैं। वे किराया वसूलते हैं और टैक्स नहीं चुकाते तथा इस धन का इस्तेमाल शासन के खिलाफ करते है। बकौल चिदंबरम, 'नक्सली लुटरों की तरह बैंकों को लूट कर और खनन उद्योगों से पैेसे ऐंठ कर धन इकट्ठा करते हैं। इस धन से हथियार खरीदते हैं और सुरक्षाकर्मियों से भी हथियार लूटते हैं।
भारत, पाक, नेपाल या बांग्लादेश की सीमा पर स्थित बाजारों से आसानी से हथियार खरीदे जा सकते हैं। नक्सली इन बाजारों से हथियार खरीदते हैं।' नतीजतन आतंकवाद से भी विकराल और हिंसक चेहरा माओवादी नक्सलियों का आतंक एक प्रकार से राजद्रोह का रूप धारण करता जा रहा है। इस बात पर डॉ. सेन और उनके साथियों को राजद्रोह की सजा सुनाकर रायपुर के सत्र न्यायालय ने अपनी मुहर लगा दी है। जाहिर है, कानून के इस फैसले के बाद माओवादी-नक्सली और उनके समर्थक न्याय के लिए अब नया अभियान चलाएंगे।